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Why is the Sky Blue? (in Hindi) आसमान नीला क्यों होता है?

आसमान नीला क्यों होता है । आज का हमारा सवाल उन सवालों की लिस्ट में से एक है जिसको ज्यादा बच्चे पूछा करते है और जिसका बड़ों के पास कोई जवाब नहीं है। 

लेकिन आपने भी कभी न कभी खाट पर लेटे लेटे आसमान के रंग को लेकर यह सवाल जरूर किया अगर हां तो आज बहुत बचकानी मिलेगी क्योंकि आजकल प्रदेश के आसमान नीला क्यों दिखता है। गुलाबी पीला तो जितना। हमें आसमान मिला तीन चीजों की वजह से दिखता है। 






आसमान नीला क्यों होता है?

सूरज की रौशनी हमारी हवा और हमारी आँखें सूरज से आने वाली सफेद लाइन जो में दिखती है उसे विजिबल लाइट कैसे। ऐसा नहीं है कि सूर्य से सफेद रोशनी निकलती है बल्कि सूरज से अलग अलग तरह की किरणें भी निकलती हैं जो हमारी आंखें देखी सकती है जैसे यूवी रेज या सफेद रौशनी जिसको हम देख सकते हैं अलग अलग रंगों से मिलकर बनती है और इन रंगों को सात अलग अलग रंगों में बांटा गया है। 

बचपन में हमने इन रंगों के बारे में पढ़ा था और नहीं भी पढ़ा तो आदमी सात रंगों वाला इंद्रधनुष तो देखा ही होगा जो सूरज के इस सफेद लाइन से ही बनता है और अगर आप सफेद लाइट को एक स्पेशल क्लास जिसे पुलिस कहती है के द्वारा देखेंगे तो आपको ये सात रंग देखने को मिल जाएंगे जो सूरज से आने वाली इस सफेद लाइट कटान में थोड़ा जान लिया लेकिन अब हमें अपनी हवा को भी समझना होगा। हमारी हवा में तरह तरह की गैसें मौजूद होती हैं जिनमें ऑक्सीजन और नाइट्रोजन की मात्रा सबसे अधिक पाई जाती


और इसी कारण हमारी हवा ऑक्सीजन और नाइट्रोजन के छोटे छोटे कणों से भरी हुई है जो हमें अपनी आखों से नहीं दिखते। ये कण भी हमारे आसमान को नीले रंग देने में मदद करते हैं। कैसे अभी बता दें। आपने कभी सोचा है कि सात रंगों की पद्दति हमेशा इसी क्रम में क्यों दिखती है। 

इसमें सबसे ऊपर लाल रंग सबसे नीचे बैंगनी रंग अधिकतर वैसे ही सात अलग अलग हिसाब से बिखरते हैं पर इस हिसाब को समझने के लिए हमें लाइट के स्वभाव को समझना होगा। 

लाइट एक पेयर यानी तरंग की तरह होती है हर रंग की लाइट की तरंग की लंबाई अलग अलग होती है जिसे वेवलेंथ भी कहते हैं जैसे इन सात रंगों में सबसे लंबी तरंग लाल लाइट बनाती है फिर संतरी और इसी क्रम में चलते चलते सबसे छोटी तरफ बैंगनी लाइट बनाती है।

 ये तरंगे जब हवा में मौजूद कणों से टकराती है तो बिखर जाती है। बड़ी तरंगों का टकराव किसी कारण से कम ही होता है जबकि छोटी तरंगे ज्यादा बार टकराती है। इसी लिए सबसे कम लाल और संतरी रंग की लाइट बिखरती है और सबसे ज्यादा बिखराव नीले और बैंगनी रंग की लाइट का होता है। इसी बिखराव के कारण हमें अपने आसमान का रंग नीला दिखता है क्योंकि थोड़ा बिखराव आने का भी होता है और मामूली सा लाल का भी।

 इसीलिए हमें अपना आसमान एकदम नीला नहीं दिखता और इन्हीं रंगों की अलग अलग मात्रा में बिखरने से हमें अपने आसमान का आसमानी रंग मिलता है। बगैर किया पर सवाल रहने वाली बात ये है कि जब सबसे छोटी तरंग बैंगनी रंग की लाइट की होती है और सबसे ज्यादा बिखराव बेसी का होता है तो फिर हमें अपना आसमान बैंगनी रंग की तरह ज्यादा


दिखता है। इस सवाल के जवाब में प्रमुख भूमिका हमारी आंखों की है। वैसे हमारी आंखें पीले और बैंगनी रंग के मिक्सचर में नीले रंग की तरफ ज्यादा सेंसिटिव यानी संवेदनशील होती है।

 मतलब अगर नीले और बैंगनी रंग का कोई भी मिश्रण होता है तो वह ज्यादा नीले रंग को ही देखती है तो जब रंगों के इस बिखराव में नीले और बैंगनी रंग दोनों होते हैं तो हमारी आंख ज्यादा नीले रंग को देखती है और इसीलिए हमें अपना आसमान ऐसा नीला दिखता है तो आज हमें अपने आसमान के नीले होने का कारण समझ आया लेकिन यह सवाल कभी खत्म नहीं होते क्योंकि अभी मेरे दिमाग में ये सवाल आ रहा है कि सारे टाइम तो आसमान नीला नहीं होता। सूरज डूबते समय हमारा आसमान लाल और संतरी सा क्यों दिखता है।




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